एक छोटी सी बच्ची – Love Story

एक छोटी सी बच्ची – Love Story

बात आज से 5 साल पहले की है जब में अपना कॉलेज पूरा करके जॉब की तलाश कर रहा था । लेकिन मेरी किस्मत आजकल जॉब मिलना मतलब रेत में सुई ढूंढना । लेकिन किसी तरह मेने 1 प्राइवेट कंपनी में जॉब ले ली वहां मुझे night में जॉब मिल गई। सैलरी ज्यादा नही थी लेकिन फिर भी खुद का खर्च ओर घर की आर्थिक स्थिति की वजह से मैने कर ली। और साथ मे IAS के लिए prepration शुरू कर दी मुझे पता थी राह आसान नही है लेकिन में फिर भी अपनी जिद पर अड़ा रहा और तैयारी शुरू कर दी। 1 महीना जॉब करने के बाद हाथ मे सैलरी आई और अभी तक कुछ दोस्त बन गए थे तो ओर भी अच्छा लगने लगा।

सैलरी आधी घर मे दी और बाकी से किताब खरीद ली। फिर कुछ ऐसा हुआ जिसका मेने अभी तक नही सोचा था। में रात में 3 बजे अपने घर जा रहा था ऑफिस से काम ख़त्म करके । जैसे ही मेने गाड़ी में चाबी लगाई तभी पीछे से 1 मधुर आवाज आई। प्लीज् क्या आप मुझे बस स्टैंड तक छोड़ देंगे आज मेरे भैया नही आ पाए। थोड़ी देर तो में सोच में पड़ा रहा लेकिन फिर सोचा इतनी रात में इन्हें कोनसा ऑटो मिलेगा तो मैने कह दिया अगर आपको कोई समस्या नही है तो ठीक है। हम रास्ते मे जा रहे थे उस लड़की ने कहा “आपका क्या नाम है” मेने कहा “राहुल” फिर मेने पूछा “आपका नाम” तो उसने कहा “आरती” । बचपन से ही लड़कियों से ज्यादा बात नही करता था सरकारी स्कूल में जो था तो कुछ नही बोला। फिर रास्ते भर हम दोनों ऐसे ही गोलमाल फ़िल्म के तुषार कपूर की तरह गूंगे बने रहें। 20 मिनट बाद बस स्टैंड आ गया ओर मेने उसे वही छोड़ दिया शायद उसका घर वही पास में था । फिर में अपने घर चला गया । फिर अगले दिन में ऑफिस गया तो लंच टाइम में उससे टकरा गया तो मेंने उसे sorry बोल दिया ।

इसके बाद में अपने कंप्यूटर पे ओर बो अपने कम्प्यूटर पे। रात को 3 बजे फिर में अपने घर और फिर वही सब । वापिस उसकी आवाज ओर फिर वही की आज भैया नही आ पाए। में हल्का सा मुस्कुराया ओर बोला ठीक है चलिये। फिर रास्ते मे उसने पूछा आप ज्यादा बात नही करते क्या मेने कहा करता हूँ लेकिन अनजान लोगों से नही। तो उसने बोला अच्छा । फिर बोली हम 1 ही ऑफिस में काम करते हैं और हमारा घर भी 1 ही रोड पे है । तो क्यों न हम दोत्ती कर ले । मेने कहा क्या फायदा आज दोस्ती होगी कल फिर हम मिलेंगे जलेंगे ओर फिर हमें प्यार होगा । फिर आपकी शादी अलग और मेरी शादी अलग क्योंकि घरवाले मानेंगे नही आपके। तो क्या फायदा इससे अच्छा आप अपना काम कीजिये में अपना काम करता हूँ। इतना कहा ही था कि आरती जोर जोर से हँसने लगी । बहुत प्यारी हसी थी बो में आगे के कांच में साफ देख रहा था बो आंखे बो उड़ते बाल और सबसे ज्यादा उसकी मुस्कान । ऐसा लग रहा था कि किसी छोटे बच्चे को चाँद मिल गया हो। फिर मेने पूछा क्या हुआ तो उसने बोला कि you are so cute. मेने कहा I know तो उसने कहा पागल हो इतना लंबा कोन सोचता है लगता है आप फिल्मे ज्यादा देखते है । मेने कहा है लेकिन Hollywood की। फिर उसने कहा ऐसा कुछ नही होता आपको गलतफहमी है दोस्ती और प्यार में बहुत फर्क होता है । फिर मेने कहा अपने अपने सोचने का नजरिया है ये तो। इतने में ही उसका घर आ गया । और में भी अपने घर की राह पे चल दिया। अपनी मस्ती में सुनसान सड़क पर गाना गाते हुए।

जो दिल को बहुत सुकून देता था। मेने दोस्ती नही की थी लेकिन फिर भी हम आफिस में एक दूसरे के काम मे हाथ बड़ा देते थे। 1 हफ्ते ऐसा ही चलता रहा और अब बो गाड़ी शेयर के बदले में गाड़ी में पेट्रोल भी डलबा देती थी । उसके बाद उसका भाई आने लगा लेकिन फिर भी मुझे कोई फर्क नही पड़ा । लेकिन 1 2 दिन बाद ही कुछ कमी सी महसूस होने लगी । हम 1 ही रास्ते जाते थे और साथ मे ही जाते थे लेकिन में अपनी गाड़ी से ओर बो अपने भाई की गाड़ी से। 3 4 दिन उसके भाई की गाड़ी के साथ ही चलता रहा । शायद उसने अपने भाई को मेरे बारे में बताया था । तो 1 दिन उसके भाई ने मुझसे मुलाकात की 1 पल को तो मुझे लगा आज पिट जाऊंगा लेकिन जब मैने कुछ गलत नही किया तो क्यों डरूँ। उसके भाई ने कहा कि बहुत कुछ सुना है आरती से आपके बारे में बहुत तारीफ करती है आपकी। मेने कहा ऐसा नही है जी बस आपकी बहन ही खुद बहुत अच्छी इंसान है तो उन्हें सभी लोग अच्छे लगते है। फिर उसके भाई ने कहा बहुत ही अच्छे घर से लगते हो आप। मेने कहा जी मा बाप ने बहुत अच्छे संस्कार दिए है इसलिए। उसने कहा कि मेरा छोटा सा business है तो मुझे ज्यादातर बाहर जाना पड़ता है इसलिए आरती को रात में ऑटो में घर जाना पड़ता है ।

अगर आपको दिक्कत न हो तो please आप आरती को घर तक छोड़ दीजियेगा । आपके तो रास्ते मे ही पड़ता है । बाकी आपके पेट्रोल के पैसे की टेंशन न लीजिये। मेने कहा ठीक है वैसे बबई निकलता तो आपके घर के सामने से ही हूँ। उसने कहा बहुत धन्यवाद आप जैसे लोग बहुत कम मिलते है आजकल। अगले दिन से फिर से ऑफिस में उसने मेरी मदद की । ओर हम घर के लिए निकल लिए । में अपनी धुन में ही था भूल गया था कि बो पीछे बेठी है में तो बस गाने गा रहा था । जब याद आया तो रुक गया फिर उसने कहा बहुत प्यारी आवाज है आपकी गाओ ना तो मैने कहा ऐसा कुछ नही है बस थोड़ा बहुत गुनगुना लेता हूँ। फिर उसने कहा नही बहुत अच्छी आवाज है आप किसी सिंगिंग शो में ट्राय कीजिये मेने कहा नही आरती जी इतनी अच्छी आवाज नही है और इतना टैलेंट नही है । फिर उसने कहा जब आपकी इच्छा थी तो आपको सीखना चाहिए था तो मैने कहा जिंदगी में दूसरे काम और कैरियर बनाते बनाते पता ही नही चला कब समय निकल गया । इन सब चीजों के लिए वक्त नही मिला। फिर मेने आरती से पुछा आपको क्या पसंद है। तो उसने कहा मुझे तो बस घूमना फिरना ओर दोस्तो के साथ मस्ती करना बहुत पसंद है। मेने कहा अच्छा है आपके पास दोस्त तो है। तो उसने पूछा आपके नही है क्या ? तो मैने कहा है लेकिन सब अपनी जिंदगी में ओर कैरियर बनाने में उलझे है तो उसने कहा इसलिए तो में कह रही हूँ मुझसे दोस्ती करलो तो में उसके तरफ देखने लगा फिर उसने कहा अच्छा ठीक है बाबा मत करो । फिर मेने कहा ठीक है आज से हम दोस्त। न जाने क्यों बो एकदम खुश हो गई। अब उसके साथ साथ मे बात करने की आदत हो गई थी ।

20 कि मी का रास्ता पता ही नही चलता था। अगले दिन में ऑफिस नही गया तबियत ठीक नही थी तो उसका सुबह कॉल आया कि आप ऑफिस नही आये तो मेने कहा है तबियत ठीक नही है इसलिए। तो उसने कहा आप मुझे अपने घर का पता बात दीजिये में आपको देखने आ जाउंगी । मेने कहा नही नही में ठीक हूँ आज रात को आऊंगा । फिर रात को जैसे ही में ऑफिस पहुँचा तो नीचे ही आरती खड़ी थी तो मैने गाड़ी स्टैंड पे लगाई तो बहुत तेजी की तरफ आते हुई बोली कि आपने मुझे क्यों नही बताया कि आप बीमार है और न ही आपने ऑफिस में बताया पता है कितनी डर गई थी में। तो मेने कहा सॉरी आपको मेरी वजह से ऑटो में जाना पड़ा तो बो फिर हस पड़ी। मेने पूछा अब क्या हुआ तो उसने बोला बुध्धु क्या हुआ ऑटो से जाना पड़ा तो मुझे बस ये डर था कही आपको कुछ हो न जाये। फिर हम ऑफिस में चले गए। सुबह घर के लिए निकले तो उसने बोला अब आप जब भी ऑफिस नही आये तो बता देना मेने कहा ठीक है। फिर उसने मुझसे कहा कि मुझे आपसे कुछ कहना है । में उसकी आँखों मे आज अलग तरह की कशिश देख रहा था । तो मैने कहा बस में इसी चीज से डर रहा था मुझे पता है आप क्या कहोगी लेकिन मुझसे कोई उम्मीद मत रखना। तो उसने कहा तुम्हे बस हमेशा 1 ही बात दिमाग में आती है क्या पागल में तो ये पूछ रही थी कि इस sunday को हम कहि घूमने चलते है मेरे सब दोस्त बिजी है और मेरा बहुत मन है इसी बहाने हम एक दूसरे को ओर जान लेंगे।

मेने कहा अच्छा आपके दोस्त लोग नही का रहे तो आप मुझे पकड़ रही हो। तो उसने कहा नही जाना तो मना करदो ओर मुह बना लिया तो मैने कहा ठीक है चल देंगे लेकिन आप अपने भाई से पूछ के आना । उसने कहा ठीक है। अब तक मे ये समझ चुका था कि ये लड़की बहुत ज़िद्दी है। फिर हम sunday को घूमने गए 1 मंदिर जो कि पहाड़ी पे था। वही पहाड़ी पे बैठके बात कर रहे थे । तो उसने मुझसे मेरी फॅमिली के बारे में पूछा मेने सब बता दिया फिर उसकी फैमिली के बारे में पूछा उसने भी बता दिया । फिर बो बोली कि आपका क्या सपना है। तो मेने कहा मुझे तो बस कलेक्टर बनना है तो बो जोर जोर से हँसने लगी मुझे लगा मेरा मजाक उड़ा रही है फिर उसने सॉरी कहा और बोली इतना आसान नही है तो मैने कहा आसान तो कुछ भी नही है लेकिन मन मे इरादा ओर सच्ची लगन के साथ प्रयास किया जाए तो सब हासिल किया जा सकता है। ये सुनकर बो बोली अच्छा तभी आपको इतनी अच्छी अच्छी बातें आती है। तो मैने कहा मतलब केसी तो उसने कहा तभी आप बिलकुल अलग हो । मुझे फिर कुछ समझ नही आया मेने पूछा मतलब अलग केसे तो आरती ने कहा सुनो जब में अपने दोस्तो के साथ होती हूँ तो बो बस मस्ती करती है दुसरो का मजाक उड़ाते है और बगैरा बगैरा । ओर आप बिलकुल अलग हो अपनी दुनिया मे खोये सबसे अलग हमेशा देश दुनिया की बाते ओर कभी कभी लोगो को नसीहत भी। तो मैने कहा हा ये सब मुझे अच्छा लगता है तो फिर बो बोली बहुत कम लोग होते है आपके जैसे जो दूसरों को राह दिखाते है और देश दुनिया के बारे में सोचते है भगवान करे आपका IAS का सपना पूरा हो । मेने thanks कहा। और उससे पूछा आपका क्या सपना है तो उसने कहा मेरा तो बस एक ही सपना है कि में अपने दोस्तो के साथ घूमूं फिरू ओर मजे करू। मेने उससे कहा आप अपने दोस्तो से बहुत प्यार करती हो ना।

तो उसने कहा we are besty. मेने कहा अच्छा है आप नसीब वाली हो। उसने मुझसे पूछा आपकी कोई GF है क्या या फिर पहले कोई हो। मेने कहा please आरती फिर से शुरू मत हो जाना। तो उसने कहा ठीक है मत बताओ । तो मैने कहा सुनो कोई थी नही क्योंकि टाइम नही मिला तो उसने पूछा आगे कोई इरादा । मेने कहा कोई चांस नही आपका भूल जाओ क्योंकि अभी मेरा ध्यान पढ़ाई और कैरियर पे है। तो उसने कहा तुम्हे पता है 10 लड़के पीछे पड़े है मेरे ओर तुम मुझसे हमेशा भागते हो। मेने कहा जिस दिन तुम मेरी जगह आओगी समझ जाओगी अभी आप बच्ची हो वे यह कहकर में उन जगह से चला गया । जब वापिस आया तो उसने पूछा कहा से बच्ची हूँ 21 साल की हूँ और समझदार भी हूँ। मेने कहा आप अक्ल से बच्ची हो। और मुस्करा दिया । फिर उसके उसके घर छोड़ दिया और म अपने घर चला गया । लेकिन क्या पता उस बच्ची सी अक्ल वाली लड़की ने क्या जादू किया था उसकी हरकते याद कर करके मुझे हसी आ जाती थी। लेकिन मैन कभी उसे अहसास नही होने दिया क्योंकि में जनता था कि हमारी दुनिया बहुत अलग है हम बिल्कुल अलग सोचते है। ओर हमे ज़िन्दगी में बहुत ही अलग जाना पड़ेगा ।

अगले दिन हम ऑफिस में गए तो उसने बोला कि हम इस Sunday को फिर से घूमने चले तो मैने कहा क्यों इस बार फिर से आपके दोस्तों ने मना कर दिया क्या।तो उसने कहा नही बो तो जा ही रहे है लेकिन आप भी चलोगे तो मुझे अच्छा लगेगा तो मैने कहा अगर उन्हें problem नही है तो मुझे भी नही है में चल दूंगा तो बो बहुत खुश हो गई। अब न जाने क्यों मुझे भी उसके साथ घूमना अच्छा लगने लगा। Sunday को उसने अपने दोस्तों से मिलवाया ओर हम वही मंदिर चले गए । जब वहां पहुचे तो सब मस्ती कर रहे थे और आरती बहुत खुश थी । क्योंकि बो बहुत दिनों बाद अपने दोस्तो के साथ कही बाहर घूमने आई थी। लेकिन में अकेला था बिल्कुल क्योंकि में किसी को ज्यादा जनता नही था लेकिन आरती को खुश और हस्ता हुआ देखके बहुत अच्छा लग रहा था। फिर उसके दोस्त लोग मेरे बारे में बात करने लगे तो आरती ने सब बता दिया कि ऐसे है वैसे है और मूझे पसंद है लेकिन ये मुझे पसंद नही करते । तो सब हँसने लगे कि वाह आप पहले ऐसे इंसान है जो आरती को मना कर रहे है । तो मैने कहा हम बिल्कुल अलग है और में अपने IAS सपने को पहले पूरा करना चाहता हूँ। तो सब हँसने लगे और बोलने लगे IAS ओर तुम । तो मैने कहा क्यों कोई दिक्कत है आप लोगो ।

तो 1 दोस्त बोला कि उसके लिए तो बहुत बड़ी बड़ी कोचिंग में पड़ना पड़ता है तो मैने कहा ऐसा जरूरी नही है आपमें अगर लगन है तो आप घर बैठे भी पड़ सकते है। तो सभी चुप हो गए लेकिन क्या पता शायद बो मुझे नीचा दिखाना चाहते है आरती के सामने तो दूसरा दोस्त बोलता है अपने कॉलेज कम्पलीट कर लिया तो आरती बोलती है हां कर लिया मुझे बताया था । तो बो लड़का बोलता है कोनसा कोर्स किया मेने बता दिया इंजिनीरिंग फिर पूछता है कोनसी ब्रांच थी मेने कहा computer sciene फिर उसने पूछा किस साल किया आपने मेने कहा आखिरी साल। फिर उनमें से 1 ने पूछा आपकी कितने % बने मेने कहा 60 % फिर तीसरा लड़का बोला डिग्री दिखा सकते हो तो फिर में आरती के तरफ देखने लगा । तो उसने कहा बस बहुत हुआ फ्रेंड्स । शायद बो समझ गई थी कि ये लोग मेरा मजाक उड़ा रहे है । लेकिन उसके दोस्त कहा मानने वाले थे बोलते है ठीक है मत बताओ खरीद ली होगी डिग्री बस फिर क्या था मेरे सब्र का बांध टूट गया था और में जबाब देने वाला था लेकिन तभी आरती उससे बोलो oye पहले तू अपना कॉलेज खत्म कर ले फिर दूसरे की चिंता करना और कहाँ भूल गया तुझे interview से ही भगा दिया था। फिर में वहाँ से जाने लगा तो आरती बोलती है sorry आपको मेरी वजह से ये सब सुनना पड़ा तो मैने वही कहा आपकी गलती नही है वैसे भी ये लोग बच्चे है अभी जब थोड़ा बाहर निकलेंगे तो अकल ठिकाने आ जायेगी और थोड़ी तमीज भी आ जायेगी लोगो से बात करने की। ओर में वहाँ से चला गया ।

अगले दिन फिर आरती से मुलाकात हुई उसने फिर मुझे सॉरी बोला कल के लिए मेने कहा आपकी कोई गलती नही। फिर हम काम करने लगे । 3 बजे घर के लिए निकले तो उसने रास्ते मे मुझसे पूछा कि अगर आप IAS नही बने तो क्या करोगे । तो मेने कहा पता नही शायद फिर बाहर किसी बड़ी प्राइवेट कंपनी में जॉब करूँगा। ओर इसी बीच मेरी गाड़ी के नीचे 1 कुत्ता आ गया वे हम दोनों नीचे गिर गए। मेरा 1 पेर गाड़ी के नीचे आ गया । और आरती थोड़ी दूर गिरी थी। फिर मेने गाड़ी उठाई और फिर आरती को देखा तो बो ठीक थी लेक़िन मेरे 1 पैर में चोट आई थी। तो हम गाड़ी से ही सीधे डॉक्टर के पास गए उन्होंने बोला ज्यादा चोट नही है बस थोड़ा 4 5 दिन आराम कीजिये। फिर हम घर की ओर चल दिये । उसके बाद जब आरती के घर के सामने पहुचे तो मेने बोला कि sorry यार कल से आपको ऑटो में आना पड़ेगा तो उसने कहा अरे कोई बात नही वैसे भी हम दोस्त है आप कोई मेरे नौकर नही हो। फ़िर उसने कहा आपका पता दे दीजिए में आपको देखने आउंगी तो मेने कहा कोई जरूरत नही है मामुली चोट है ठीक हो जाऊंगा आप क्यों परेशान हो रही हो। लेकिन बो नही मानी फिर मेने पता दे दिया। अगले दिन बो मेरे घर आई ।

मुझे नही पता था कि आरती आएगी। लेकिन बो जैसे ही आई मेरे होश उड़ गए मुझे यकीन नही था । लेकिन अब क्या कर सकते है मेहमान को भगा तो नही देंगे। एक तो मेरा घर छोटा सा ऊपर से छत से पानी टपक रहा था क्योंकि बारिश का मौसम था। फिर मेने मम्मी को बोला ये मेरे ऑफिस में मेरे साथ काम करती है। मम्मी बोली बेठो बेटी । इतने में ही मेरी छोटी सी लेकिन दिल के करीब बहन सुमन आ गई । उसने तुरंत कहा अच्छा आप ही है आरती जिसके बारे में भैया अक्सर बाते करते है और मुझे ताने देते है। तो आरती ने पूछा अच्छा क्या बोलते है आपके भैया मेरे बारे में। तो सुमन ने कहा भैया बोलते है कि तू बिल्कुल समझदार नही है और आरती बहुत ही समझदार ओर होनहार लड़की है । और भी बहुत कुछ बोलते है आपके बारे में। तो आरती ने कहा ये तो आपके भैया का बड़प्पन है सुमन जी। इतने में मम्मी चाय ले आई 2 कमरे थे घर मे उसमे भी 1 कमरे में किचन था । और दूसरे कमरे में ही सब लोग उठते बैठते थे। थोड़ी देर आरती से बात की इतने में ही कुछ लोग घर के सामने आ गए और सभी लोग गाड़ी से थे लगभग 10-12 लोग थे। आरती थोड़ी side में बैठ गई। जैसे ही सब आये सब पूछने लगे सर क्या हुआ क्या हुआ कैसे लगी । तो फिर मेने सबको बताया और फिर सब 10 15 मिनट बाद चले गए। तब आरती बोली कि ये सब लड़के आपको सर क्यों बोल रहे थे। इससे पहले में कुछ बोलता मेरी बहन सुमन बोल पड़ी। ये सब भैया के student है जो उनसे पड़ते है। ओर भैया इन लोगो को free में पढ़ाते है। तब मैंने आरती की नजरों में अपने लिए इज्जत देखी। फिर आरती ने कहा अच्छा में अब घर चलती हो और आप अपना खयाल रखना जब ठीक हो जाओ तभी ऑफिस आना। मेने कहा अब में ठीक हूँ। कल से ऑफिस आऊंगा । तो उसने कहा ठीक है। अगले दिन में ऑफिस पहुँचा तो आरती ने पूछा अब कैसे है आप मेने कहा ठीक हूँ। फिर हम काम करने लगे ।

3 बजे ही हम घर से निकले तो रास्ते मे ही आरती ने कहा आपने ये तो कभी बताया नही की आप इतने बड़े बड़े बच्चों को पढ़ाते हो। तो मेने कहा बचपन से ही पड़ने ओर पढ़ाने का शोक था । लेकिन समय नही मिल पाने के कारण किसी स्कूल में ज्यादा नही पढ़ाया ओर स्कूल में बच्चों को ज्यादा नही पड़ा सकते इसलिए छोड़ दी। लेकिन यहां पर कुछ ऐसे students मिल गए जो government जॉब की तैयारी करना चाहते थे । 1 दिन में चाय की दुकान पे चाय पी रहा था तभी 3 4 लड़को को सरकारी जॉब की तैयारी की बात करते सुना तो में उनके पास गया और उनकी बात सुनी तो सब चाहते तो थे पढ़ना लेकिन किसी के पास फीस के पैसे नही थे। तो मैने उनसे कहा अगर आप लोगो को में 1 सलाह दु जिससे आपकी जॉब लग जाए आसानी से तो । तो सब मेरी तरफ देखने लगे और बोले ठीक है भाई बताओ। तो मैने कहा आप किताब लाके खुद घर पे क्यों नही पड़ते ओर आज कल तो इंटरनेट पे सब मिल जाता है। तो सब कहने लगे अगर इतना आसान होता ये सब तो अभी तक सब लोग सरकारी नोकरी कर रहे होते ।

तो मैने कहा अगर आप लोगो को कोई प्रॉब्लम न हो तो 2 3 दिन के लिए मुझसे पड़के देखलो अगर अच्छा लगे तो आगे पड़ना ओर में आप लोगो से फीस भी नही लूंगा। तो पहले तो बो लोग हँसने लगे फिर उनमें से 1 लड़का बोला आप पक्का पड़ा दोंगे तो मैने कहा 1 बार देखलो में कोनसा आपको घर मे ही पकड़ के रखूंगा । अगर नही आये समझ तो मत आना कल से। तो बोले ठीक है आप अपना पता दे दीजिए हम कल आ जाएंगे । तो मैने उन्हें पता ओर समय बता दिया । अगले दिन उनमे से 2 लड़के आ गए । तो मैने उन्हें घर मे लेके गया और कहा घर छोटा है लेकिन आप हम नीचे आराम से बैठ सकते है। तो फिर मेने उन लड़कों पढ़ाया उन्हें सब समझ आ गया । फिर अगले दिन बो अपने 2 ओर दोस्तो को ले आये । इस तरह 9 10 लड़के हो गए । और कुछ ही दिनों में बो लोग मुझे समझ गए और इज्जत करने लगे और उन्हें भी विश्वास हो गया कि बो ज़िन्दगी में आगे कुछ कर पाएंगे और इस तरह बो पहले भाई बोलते थे ओर कुछ ही दिनों में सर बोलने लगे। इतना सब सुनने के बाद आरती बोली वाह आप तो बहुत talented हो मेने कहा नही ये सब मुझे अच्छा लगता है। तो आरती ने कहा आप सच मे बहुत अलग हो। ओर फिर से मैने उसे उसके घर छोड़ दिया।

तब तक सब ठीक चल रहा था लेकिन अगली रात ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। अगली रात जब में ओर आरती ऑफिस से घर जा रहे थे तो आरती थोड़ी चुप चुप सी थी तो मैने कहा आज क्या हुआ आपको कुछ नही बोल रही तो उसने कहा मुझे आपसे जरूरी बात करनी है। मेने कहा ठीक है बोलो। तो उसने कहा ऐसे नही कहि गाड़ी रोकलो तो मैने कहा ऐसे ही बोलदो क्या बोलना है। तो उसने गुस्से में कहा नही गाड़ी रोको। तो फिर मेने गाड़ी को साइड में लगा दिया और उससे पूछा है बताओ। लेकिन तभी जोर से बारिश होने लगी। मुझे बारिश बहुत पसंद थी तो में भीगने लगा तो उसने मुझसे कहा आपकी अभी तबियत ठीक नही हई ओर बारिश में तबियत खराब हो जाएगी। और उसने मेरा हाथ खीचके जबरदस्ती मुझे रोड के पास लगे किसी घर के आगे ले गई। मेने पहली बार उसकी उसकी ये हरकत देखी अपने लिए। फिर मेने उससे पूछा कहो क्या बात थी। तो उसने कहा पहले आप कसम खाओ की गुस्सा नही करोगे । मेने कहा ठीक है बोलो। तो आरती ने मेरी ओर देखा और बोली मुझे आप बहुत पसंद है और में आपके साथ अपनी पूरी ज़िंदगी बिताना चाहती हूं। बो बहुत कुछ बोल रही थी और में बस सुने जा रहा था। इतने में उसने कहा अब आप बोलो । लेकिन में क्या बोलता वही बात का डर था और बो हो ही गई। मेने उससे कहा जब आपका दिमाग सही हो जाये तब बात करेंगे तो बो बोलने लगी नही में ठीक हूँ आप बताओ मेने कहा कि यार मेने आपको पहले ही कहा था इन सब चक्करो से मुझे दूर रखना लेकिन देखो आज वही सब हो रहा है। ओर मेने कहा में ही क्यों आपके तो इतने अच्छे दोस्त है और बिल्कुल आपकी तरह ही है आप उनमे से किसी को चुन लो। ये सब सुनके बो भड़क गई । और बोली मुझे आप पसंद हो और में आपसे प्यार करती हूँ । जो आप हो बो लोग 100 जन्म में भी आपकी जगह नही ले सकते । मेने कहा नही हमारी life बहुत अलग है ।

हमारे घर का माहौल भी अलग है। तो बो बोली यार हम एक ही समाज के है । और मेरे घरवालो को भी आप पसंद हो मेरे भैया भी आपकी इज्जत करते है । और में भी आपके परिवार को संभाल लूंगी । please please please please यार मान जाओ आपके हाथ जोड़ती हूँ पर पड़ती हूँ। उसकी आँखों मे पहली बार इतना दर्द देखा और बो रोये जा रही थी। मेरे भी आंख में आंसू आ गए थे। लेकिन मेने उसे पकड़ के गले लगाया और बोला में समझ सकता हूँ आप पर क्या बीत रही है। 1 पल को मेरा भी मन हुआ कि हा कर दु लेकिन में उसे ओर अपने आपको जानता था कि हम बहुत ही अलग है और बो अभी जो भी बोल रही है emotional होके बोल रही है और शायद उसे मुझसे ज्यादा मेरा talent पसन्द आया । फिर मेने उसे दूर किया और बोला आरती आप बहुत अच्छी हो और बहुत ही प्यारी हो । आपको बहुत अवसर मोके मिलेंगे भविष्य में। लेकिन वो मानने वालों में से नही थी बहुत ही ज़िद्दी थी। तो मैने कहा ठीक है बाबा । ओर मेने है कर दी। लेकिन ये हा मुझे अंदर ही अंदर खाये जा रही थी। लेकिन उसका मुस्कराहट भर चेहरा मानो ऐसा लग रहा था 1 बार ओर गले लगा लूँ ओर छोड़ू ही नही। फिर उसने कहा देखो अब तो बारिश भी रुक गई । चलो चले घर नही तो फिर से शुरू हो जाएगी। उसकी खुशी का ठिकाना नही था बो पीछे से मेरे कंधे पे सर रखके बेठी थी और में अपने आंसू बहा रहा था। क्योंकि अब मेरी खुद से ही लड़ाई थी । में अंदर ही अंदर गहरे विचारो में था क्योंकि नया रिश्ता कोई से भी हो आपके जीवन मे हलचल तो लाता ही है। लेकिन तब तक मे सोच चुका था की आरती को घर छोड़के कही बहुत दूर चला जाऊंगा इस शहर से। ओर मेने उसे उसके घर छोड़ दिया । तो उसने मुझसे कहा ज्यादा मत सोचिये में आपको बहुत खुश रखूंगी मेने कहा ठीक है। और उसका हसता हुआ चेहरा देख के आगे बढ़ गया । और फिर मेंरे आंसू रुक नही रहे थे । उस दिन में ऑफिस नही गया ।

आरती मुझे 50 बार कॉल कर चुकी थी लेकिन मेने नही उठाया। मेने तुरंत 1 कागज उठाया और उसपे सब कुछ लिख दिया। आरती ये मेरी ख़ुश्किष्मती थी कि मुझे आप जैसी दोस्त मिली मेरे लिए यही काफी था मेने कभी इससे बढ़कर नही चाहा। आप बहुत ही समझदार हो और मेरी हर चीज को समझती हो में शायद IAS नही बन पाऊ लेकिन कोशिश करता रहूंगा । मुझे माफ़ करना में आपके लिए कुछ नही कर पाया और आपको खुशी नही दे पाया । अब मुझे फ़ोन मत करना ये नंबर मेने बन्द कर दिया और अब में आपसे ओर इस शहर से बहुत दूर जा रहा हूँ। आप मुझे ढूंढना भी मत । ओर अपने भविष्य पे ध्यान देना और अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती करना और उन सबको मेरी तरफ से नमस्कार कहना । सॉरी आरती आपको जीवनभर साथ तो नही रख सकता लेकिन 1 बात है आपने कहि न कही मेरे दिल मे बहुत गहरी छाप छोड़ी है जो शायद में जिंदगी भर नही भूलूंगा ओर भविष्य किसने देखा शायद हम फिर किसी मोड़ पे मिल जाये लेकिन में नही चाहता कि मेरी वजह से आपका जीवन खराब हो । शायद मुझे आपसे दोस्ती नही करनी थी। लेकिन आप बहुत ही अच्छी और बिल्कुल 1 छोटे से बच्चे की तरह हो उम्मीद करता हूँ आप अपना ख्याल रखोगी । ओर जीवन मे किसी को भी अपना गलत फायदा मत उठाना में भगवान से दुआ करूँगा की आपके सारे सपने पूरे हो। आपका दोस्त राहूल । मेने तुरंत अपना सारा सामान पैक किया और मम्मी ओर सुमन को लेके दिल्ली रवाना हो गया । घरवालो को कुछ नही बताया ।

बस चल दिये । और बो खत उसको पोस्ट कर दिया। बो दिन मेरा सबसे मुश्किल दिनों में से 1 था। लेकिन में जनता था अब मेरे लिए यहां कुछ नही है। रेलवे स्टेशन जाके टिकट ली। और ट्रेन में बैठ गए दिल्ली में मेरा 1 पुराना दोस्त रहता था उसी के घर गए । और जितना समान था सब उसी के घर रख दिया । उसे सारी बात बताई तो बो बोला भी तूने बहुत गलत किया उस लड़की के साथ तो मैने कहा भाई मुझे भी पता है लेकिन किसी का भविष्य खराब करने से अच्छा है उसको छोड़ दो और तू तो मुझे जनता ही है यार। तो दोस्त बोला ठीक है लेकिन अब तू यहाँ जॉब करेगा क्या मेने कहा पहले तो 1कमरा लेना है। और फिर किसी कंपनी में इंटरव्यू देंगे । दोस्त बोला ठीक है जब तक मेरे यह ही रहो। 2 दिन बाद मुझे 1 अच्छी प्राइवेट कंपनी में जॉब मिल गई। और में ओर मेरा दोस्त उसके ही घर के पास कमरे में समान रखने लगे। अब तक 1 हफ्ता हो चुका था दिल्ली में। ओर ये शहर मेरे लिए नया नही था क्योंकि मेने यहां से 3 महीने का IAS course किया था। में फिर से अपनी लाइफ जीने लगा था लेकिन दिन में ऑफिस ओर फिर रात में घर मे मेरा मन नही लगता था। तो मैने अपने दोस्त से कहा क्यों ना में यहां भी बच्चों को पढ़ाने लगु तो सब कहा सोच तो अच्छी है और यहां स्टूडेन्ट भी आसानी से मिल जाएंगे लेकिन तू यहां पढ़ायेगा कैसे तो मैने कहा 1 कमरा ओर किराये से लेते है और बो भी हम नाईट क्लास रखेंगे ताकि मेरा ऑफिस भी चलता रहे और ऐसे ही स्टूडेंट्स को लेंगे जो काम करते है ओर साथ मे तैयारी भी । थोड़ी बहुत मुश्किल के बाद 1 हफ्ते में हमे 4 5 बच्चे मिल गए और फिर से मेरा ध्यान पूरा पढ़ाई में चला गया ।

अभी तक दिल्ली में 3 महीने हो चुके थे और बस में खाली समय मे ये सोचता था कि आरती केसी होगी ठीक तो होगी न ओर भी बहुत कुछ। लेकिन फिर ये सोचकर भुला देता था कि उसके दोस्तो ओर परिवार वालो ने समझा दिया था। 2 साल हो गए अब दिल्ली में ओर ऑफिस में प्रमोशन भी मिल गया और कोचिंग में भी बच्चों की भीड़ थी और बहुत से बच्चों का सिलेक्शन हो गया था अब तक जिससे ओर भी बच्चे आने लगे । सब कुछ था अब तक खुद का घर भी ले लिया था लेकिन दिल से उसकी याद नही जाती थी ओर उसका मासूम चेहरा मेरी नजरो के सामने आ जाता था। लेकिन में ये सोच लेता था कि अब तक उसकी शादी हो गई होगी। ओर फिर से अपने काम मे लग जाता था। 5 साल हो चुके थे और अब छोटी बहन की भी शादी करा दी थी। अब मम्मी की तबियत ठीक नही रहती थी और बो हमेशा मेरी शादी का बोलती रहती थी लेकिन में मना कर देता था। लेकिन मा की हालात देखके में भी कुछ नही कर सकता था। फिर में कुछ दिनों की छुट्टी लेके घूमने निकला सोचा अपने पुराने शहर चलता हूँ ऑफिस के दोस्तो से भी मिल लूंगा ओर में अगले दिन चल दिया। लगभग 6 साल बाद में अपने पुराने शहर में था । अभी भी वही हाल थे यहां के ज्यादा कुछ चेंज नही हुआ था । मन भर आया फिर से आज । कुछ ही दूर पर मेरा पुराना ऑफिस आ गया । में ऑफिस गया तो वहाँ आज भी माहौल वैसा ही था। सर भी वही ओर लोग भी वही। मेरा ऑफिस का 1 दोस्त मिला बो मुझे देखते से ही पहचान गया । और उसने मुझे गले लगा लिया और बोला भी बहुत इंतेजार किया तेरा । फिर उसने मुझे आरती के बारे में बताया । बो बोला कि तेरे जाने के बाद आरती ने बहुत खोजा तुझे बेचारी दिन भर घूमती रहती थी पागलो की तरह उसने पूरा शहर घूम लिया और आस पास के शहर और गांव भी खोज मार लेकिन तू नही मिला ।

हम लोगो ने भी उसे बहुत समझाया लेकिन बो बहुत ज़िद्दी थी बोलती थी जब तक जान है तब तक खोजूंगी। आखिर 1 महीना बो पागलो की तरह घूमती रही और 1 दिन बीमार हो गई । 3 4 दिन बो ऑफिस नही आई उसके बाद खबर आई कि आरती ने जहर खा लिया है। ये सुनके मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और आंखों में से आंसू आ गए। लेकिन उसने बोला सही समय पे उसके घरवालों ने उसे अस्पताल पहुँचा दिया तो कुछ नही हुआ। उसके बाद बो भी शहर छोड़के कही चली गई किसी को भी नही बताया उसने न ही उसके घरवालों को न ही ऑफिस में न ही उसके दोस्तों को। ओर आजतक पता नही चला कि बो कहा गई। फिर मेने खुद को संभाला और तुरंत अपनी गाड़ी घुमाई ओर उसके दोस्तो के घर गया सब दोस्तो से पूछा लेकिन सब ने 1 ही जबाब दिया कि तुमने बहुत बुरा किया बेचारी के साथ ओर बो बिना बताए हमे चली गई। और पता नही ज़िंदा है या नही। इतना सब सुनके में टूट चुका था । और अपनी ही नजरो में खुद को अपराधी मान चुका था। अब में आरती के घर की ओर चल पड़ा । उसके घर के सामने पहुँचा ओर लेकिन उसके घर मे जाने की हिम्मत नही हुई और जाता भी किस मुह से। मेरे सामने बो सब पुरानी यादें आ रही थी । और में रोता हुआ वापिस अपने घर जा रहा था अपने नए घर की ओर। लेकिन रास्ते भर में उसके बारे में सोचता रहा और ये भी सोचता रहा काश मेने उस दिन उसके बारे में सोचा होता। काश में शहर छोड़के नही गया होता तो शायद बो मेरे साथ होती। कहते है ना कि किसी इंसान की कीमत उसके दूर जाने पर ही पता चलती है। घर पहुच कर बहुत रोया उस रात नींद तो जैसे मेरी दुश्मन हो गई थी ।

3 दिन सोया नही बहुत ज्यादा तबियत खराब थी और अब मुझे अपने ऑफिस ओर स्टूडेन्ट पे भी ध्यान देना था । जैसे तैसे मेने अपनी हिम्मत बड़ाई ओर फिर से काम पर जुट गया । लेकिन आप सब से झूठ बोल सकते है अपने आप से नहीं। लगभग 1 महीना बीत गया लेकिन में उसका चेहरा नही भूल पा रहा था और अपने आपको अपराधी मान चुका था। और हमेशा यही सोचता था की काश उस दिन रुक गया होता । लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी । सालो बीत गए थे। अब मा ओर बहन ज्यादा दबाब बनाने लगे थे शादी का क्योंकि बहन के यहां तो 1 बच्चा भी हो गया था। और उम्र भी बढ़ती जा रही थी। मा के दबाब के कारण मेने सोचा है कर देता हूँ फिर बादमे बोल दूंगा लड़की पसंद नही है। मेरा IAS बनने का सपना तो बहुत पहले ही टूट चुका था । कुछ ही दिनों बाद मा ने बताया कि 1 रिश्ता देखा है । मेने कहा ठीक है । में तो ठान के बैठा था कि चाहे कुछ भी हो मुझे मना ही करना है। लड़की देखने गए और मैने मा को बोल दिया लड़की अच्छी नही है। इसी तरह मेने 8 10 रिश्तों को मना कर दिया अब मै ओर बहन भी थक चुके थे। छोटी बहन ने आखिर 1 दिन पूछ लिया कि कहि कोई लड़की पसंद हो तो बता दो। मेने कहा ऐसा कुछ नही है सुमन। तो उसने कहा अगर हो तो बता देना। मेने कहा अगर होता तो सबसे पहले तुझे बताता पागल। ओर अपनी आंख में आंसू लिए अपने कमरे में चला गया बिस्तर पर लटके रात भर रोता रहा। सुबह जैसे तैसे खुद को संभाला और सोचा जब उस पागल लड़की ने मुझे इतना ढूंढा तो मुझे भी उसे ढूंढना चाहिए। फिर मेने 1 प्लान बनाया और फेसबुक और इंटरनेट की भी सहायता ली । और पुराने शहर में भी दोस्तो को फ़ोन लगाया मेरे भी ओर आरती के भी । ओर सबसे बहुत कुछ पूछा जानकारी ली। शायद मेने आजतक अपना दिमाग पढ़ाई में भी इतना नही चलाया होगा जितना उसे खोजने में । लगभग 1 महीना खोजा फिर भी हाथ कुछ न लगा। फिर मेने decide किया क्यों न पुराने शहर में जाके उसके घरवालों से बात की जाए ज्यादा से ज्यादा क्या होगा बो लोग सुनाएंगे मुझे या मार लेंगे। किसी की जान से तो बढ़कर ही है और मेरे जैसे इंसान को यही सजा मिलनी चाहिए। फिर में चल दिया और direct उसके घर के सामने गाड़ी रोकी उसके घर जेक गेट खोला तो सामने 1 बूढ़ी अम्मा थी । में उन्हें देखके हैरान था क्योंकि पहले तो कोई नही था ।

एकपल को मुझे लगा हो सकता है आरती की कोई रिश्तेदार होगी। जब मैने उनसे आरती ओर उसके घरवालों के बारे में पूछा तो अम्मा बोली उन्हें तो सालो हो गए ये घर बेचे। अब में ओर भी ज्यादा परेशान हो गया । में उसके घरवालों को ज्यादा जनता भी नही था तो कहा खोजता उसे। मेरी आखिरी उम्मीद भी मिटा चुकी थी। अब में बहुत ही ज्यादा निराश था। उस दिन मुझे पता चला कि दुनिया कितनी बड़ी है। हताश होके में अपने घर को चल दिया। घर पहुँचके थोड़ा आराम किया और अगले दिन फिर अपने काम मे लग गया। अब मेरी उम्मीद पूरी तरह धूमिल हो चुकी थी। मेरा आत्मविश्वास टूट चुका था । और में उसको खोजने के बारे में भूलना ही अच्छा समझ। फिर से 2 महीने बीत गए और में अपने काम मे लग गया लेकिन अभी भी दिल मे 1 कशिश सी थी और बहुत ही ज्यादा हसरत थी उसे पाने की। कुछ दिन बाद मुझे माँ ने कहा कि 1 रिश्ता आया है दिल्ली के पास में ही 1 गांव है और लड़की ने IAS का exam पास किया है अब उसके घरवालों को उसकी शादी करनी है। लड़की का नाम आरती बताया मा ने। आरती नाम सुनके मेरी आँखें नम हो गई और पुरानी यादें आंखों के सामने से गुजरती हुई दिखी। 1 हफ्ते बाद में अपनी माँ और छोटी बहन और उसके पति को लेके गांव पहुचे । अभी तक मेरा भी दिल्ली में बहुत नाम हो चुका था और मेरी night क्लास आस पास में बहुत प्रसिद्ध हो गई थी। क्योंकि दिल्ली में बहुत ही कम लोग रात में पढ़ाते थे उसमे मेरा नाम टॉप पे था क्योंकि बहुत सालो से पड़ा रहा था।

उस गांव में पहुच के हम उनके घर पहुचे । पल भर को में घर के बाहर ठहर गया और मन मे सोचा कि में सही कर भी रहा हूँ या नही। इतने में लड़की के मा बाप बाहर आ गए मेने गाड़ी साइड में लगाई और अंदर चला गया। उस घर की महक बहुत अच्छी थी। लड़की के मा बाप बता रहे थे कि इसी साल हमारी लड़की ने IAS का एग्जाम पास किया है और अभी training पे है बस traininng पूरी करके इसकी शादी कर देंगे । और फिर मेरे बारे में पूछने लगे। इतने में ही 1 लड़की सफेद रंग के सूट में ओर उसका पीला दुपट्टा ज़मीन को छू रहा था। मेंने अपनी नज़रे उसकी तरफ बड़ाई। ओर मेने उसे देखा और में खड़ा हो गया । मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई और मेरे आंख में आंसू आ गए। क्योंकि ये वही आरती थी जिसे मेने सालो पहले ठुकरा दिया था अपने सपने के लिए। उसने मुझे देखा और बो वही ठहर गई। में बस उसे देखे जा रहा था । लगभग 1 मिनट हम एक दूसरे को देखते रहे । उसकी आँखों मे भी आँसू थे । फिर अचानक से बो मेरी तरफ आई और मुझे तेजी से गले लगाया । मुझसे भी नही रहा गया और मैने भी उसे गले लगा लिया । उस दिन मानो ऐसा लगा कि किस्मत नाम की भी चीज होती है। थोड़ी देर बाद हम अलग होके बैठ गए । हमारे घरवाले क्या पता क्या सोच रहे थे । फिर हम दोनों बाहर चले गए । और मेरी बहन सबको मेरे ओर आरती के बारे में बता रही थी । मेने आरती को गाड़ी में बैठाया ओर हम बस ऐसे ही चले जा रहे थे। बो दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे हसीन पल था। फिर कुछ दूर पहाड़ी पर मैने 1 पेड़ के पास गाड़ी रोक दी और हम दोनों उस पहाड़ी पर बैठ गए और बाते करने लगे। अभी भी मानो ऐसा लग रहा था जैसे में सपना देख रहा हूँ। और मेरी तो मानो शरीर मे आत्मा वापिस आ गई हो। हम दोनों कुछ बोल ही नही पा रहे थे इतने सालों बाद एक दूसरे को देखा था ।

आरती के आंख से आंसू रुक नही रहे थे। और में उन्हें पोछे जा रहा था। उस समय बस में ये चाहता था कि ये पल यही ठहर जाए कहि न जाये। फिर मेने हिम्मत करके आरती से बोला बस पागल इतना नही रोते ओर से चुप कराया और उससे पूछा आप ठीक तो हो न। इतना कहा ही था कि उसने मुझे फिर से गले लगा लिया । मेने कहा कही नही जा रहा पागल तो उसने बोला अब कही गए न तो खूब मरूँगी आपको। मेने कहा ठीक है बाबा। फिर हम बात करने लगे। उसने नम आंखों से मुझसे पूछा कि आप बस 1 बार बोल देते में आप जो बोलते में वैसा करती आप जो कहते में मान लेती। मेने सर झुकाके कहा माफ कर दो मुझे ज़िन्दगी की बहुत बड़ी गलती थी और में अभी तक भुगत रहा हूँ। उसने कहा कोई बात नही अब में समझ सकती हूँ। फिर उसने कहा देखो आपकी छोटू सी बच्चों की अक्ल वाली आरती कलेक्टर बन गईं। फिर मेने कहा अरे है में तो भूल ही गया ये कैसे हुआ कब हुआ बताओ सब। ओर फिर मेने कहा में तो कभी सोच भी नही सकता था कि आप कलेक्टर बन सकती हो। उसने कहा आपके जाने के बाद आपको खूब खोजा लेकिन आप नही मिले फिर हमने घर बेचके शहर छोड़ दिया क्योंकि उस शहर में आपकी बहुत याद आती थी। और यहाँ आके मेने दिल्ली में जॉब करने लगी 1 कंपनी में लेकिन मन नही लग रहा था । मेरी ही कंपनी के सामने दिल्ली की सबसे फेमस IAS की कोचिंग थी । और मुझे हमेशा आपकी याद आती थी कि आपका सपना था IAS बनना । ओर मुझे लगता था कि तब तक तो आप IAS बन भी गए होंगे और आपने शादी भी कर ली होगी। फिर 1 दिन मेरी सहेली को वहाँ एडमिशन कराना था तो बो मुझे साथ लेके चली गई हमने सब कुछ समझा वहां जाके फिर मेरी सहेली ने कहा कि आरती तू भी एडमिशन ले ले मेरे साथ मे । मेने कहा नही में क्या करूँगी मुझे तो ज्यादा पढ़ाई में कुछ आता नही। ओर इतना कह के में घर चली गई। लेकिन मेरे अंदर 1 कसक चल रही थी और ऊपर से आपकी सारी बाते याद आ रही थी । आप हमेशा बोलते थे IAS बनके ये करना है बो करना है ।

लेकिन फिर में अपने ऑफिस में लग गई काम से। हमारे गांव में पानी की बहुत समस्या है । जिनके घर मे बोरबेल है बस उन्ही के यहां पानी आता है और बाकी के लोग टेंकरो से पानी मंगवाते है मुझे ये चीज बहुत अजीब लगी । गर्मी में तो औरतें ओर बच्चे भारी दोपहरी में ही पानी की तलाश में निकल जाती है। इतनी गर्मी में कोई बाहर नही निकलना चाहता ओर ये बेचारे पानी भरने इधर उधर भटकते है। 2 4 दिन मेने ऐसे ही देखा क्योंकि मुझे अपने ऑफिस के लिए बस घर से 2 km दूर से मिलती थी तो वहां तक पैदल जाना पड़ता था। । तो 1 दिन 1 बच्चे से मैने पूछा कि तुम स्कूल नही जाते तो उस बच्चे ने जो जबाब दिया उससे में पूरी तरह हिल गई। उस बच्चे ने कहा कि मेडम हमारे घर मे 4 लोग है पाप मम्मी में ओर मेरी छोटी बहन । पापा मम्मी दूसरे के खेत पे काम करते है और छोटी बहन उनके साथ जाती है । और में इधर उधर से घर के लिए पानी लाता हूँ। ताकि मेरी माँ बाप लो रात में प्यासा न सोना पड़े। और हमारे पास इतने पैसे नही है कि में स्कूल जा पाऊ। ओर बो बच्चा इतना कह के चला गया। उस दिन मेने सोचा सच मे हमारी सरकार गरीबो के लिए कुछ नही कर रही। फिर में अपने ऑफिस चली गई। ऑफिस पहुची तो मुझे अभी भी बो बच्चा ओर गांव की औरतें दिखाई दे रही थी। इतने में मैने देखा कि हम लोग कितने सुख में है सबकुछ है हमारे पास ओर इन बेचारो के पास तो जीने के लिए भी सुविधा नही है। जब में घर आई तो मेने पहली बार उस गांव का भ्रमण किया । लगभग 80% लोग गांव में खेती से जुड़े थे और उनके बच्चे सिर्फ गांव में 1 सरकारी स्कूल था उसमें जाते थे और बो भी किसी काम का नही था। अब गर्मी अपने चरम पे थी और नौतपे में तो गांव में सूखे जैसे हालात हो गए । बच्चे और औरतों के साथ में आदमी भी अपनी साइकिल से पानी लेने दूर दूर जाने लगे और हमारे घर के बोरबेल में भी पानी बहुत कम हो गया था । सिर्फ 1 ही घर लायक पानी आता था। ये सब हालात देखके मेने गांव के सरपंच से मिली और उनसे पूछा ये सब क्या है तो उन्होंने बताया कि यहाँ हर साल ऐसा ही होता है और सरकार भी कुछ नही सुनती ।

मेने तहसील में बात की लेकिन कुछ नही हो सका अब मेरी दिलचस्पी इन सब चीजों में बढ़ती जा रही थी और मुझे किसी भी कीमत पर गांव की समस्याओं का हल निकालना था । अब बस 1 ही रास्ता था कि क्यों ना कलेक्टर जी से मिला जाए ओर उनसे बात की जाए आखिर ये उनकी भी तो जिम्मेदारी बनती है। मेने कलेक्टर को सारे हालात बताए ओर उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि जल्दी ही सब ठीक करा देंगे। लेकिन कहते है ना हमारे यहां के अफसर ओर सरकार का कोई भरोसा नहीँ। पूरा 1 महीना बीत गया न तो कोई अफसर आया न ही पानी की समस्या दूर हुई। और अब तो कलेक्टर ने भी मिलने का समय नही दिया। उस दिन मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मुझे जोरदार तमाचा मार हो। गर्मी जाने में बस 15 दिन थे और मौसम बारिश का था तो मैने सरपंच जी से कहा क्यों न हम अपने गांव में 1 छोटा सा तालाब बना ले जिससे बारिश का पानी उसमे जमा हो जाये और गर्मी में समस्या न हो। सरपंच जी मान गए लेकिन अब सवाल था कि तालाब खोदेगा कौन ओर ये 1 इंसान के बस की बात नही है। तो मैने फिर से कलेक्टर की तरफ रुख किया और उनको सब कुछ समझाया उन्होंने कहा आपने सोचा तो सही है देखेंगे हम आपके लिए क्या कर सकते है। 2 दिन बाद 5 6 मजदूर तालाब खोदने वाली जगह पे आ गए जो ओर उन्होंने काम शुरू कर दिया । 3 4 दिन काम करने के बाद में बो लोग नही आये । बाद में पता चला कि सरकार ने बस उन्हें इतने ही दिन का काम दिया था । अब सरकार भी मदद नही कर रही थी और बारिश सर पर थी अगर ये तालाब नही हुआ तो फिर सालभर गांव वालों को समस्या का सामना करना पड़ेगा और गर्मी में तो हालात खराब हो जाएगी। तो फिर मेने सोचा क्यों न गांव के लोगो को समझाया जाए इस चीज को बहुत समझने पर बो लोग समझ तो गए लेकिन कोई काम करने को राजी नही हुआ लेकिन सरपंच के दबाद डालने पर ये निष्कर्ष निकाला कि हर छटवे दिन गांव के हर घर मे से 1 1 किसान आएगा और दिन भर खोदेगा इससे काम जल्दी भी हो जाएगा और किसी को नुकसान भी नही होगा। देखते देखते 7 दिन में 80 % काम हो गया और बारिश में भी अभी पूरी तरह आने में 15 दिन थे । और ठीक 8 दिन बाद काम पूरा हो गया

अब बस बारिश का इंतेजार था । और 4 दिन बाद मानसून आ ही गया और झमाझम बारिश हुई । आख़िरकार मेरे द्वारा दिखाई गई राह काम आई और कुछ ही दिनों में तालाब आधा भर गया अब बस उस पानी को गंदे होने से बचाना था तो गांव वालों की मदद से उसके चारों तरफ रेलिंग लगा दी गई जिससे कोई जानवर अंदर न जाने पाए । इसके बाद कुछ और दिन बारिश हुई जिससे तालाब पूरा भर गया । और अब सब बहुत खुश थे । और मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगा अब मेरी पहचान गांव में 1 समझदार लड़की के रूप में हुई। अब लोग इज्जत की नजरों से देखते थे। उस समय मुझे आपकी याद आ गई। आपको कभी नही भूल पाई। अब में रोज की तरह ऑफिस जाने लगी लेकिन मेरे दिमाग मे यही चलता था कि आखिर कब तक गरीब लोग दबे रहेंगे और सरकार उनका साथ नही देगी और अफसर लोग भी कुछ नही करेंगे। ये सब बातें मेने अपनी दोस्त को बताई तो बो बहुत खुश हुई और बोली हमारे यह कि सरकार कुछ नही करती और रही सिस्टम को चेंज करने की बात तो ये तब तक नही होगा जब तक मेहनती लोग नही होंगे सरकार में ओर सरकारी ऑफिस में। मेने उससे पूछा मतलब तो उसने सिर्फ इतना कहा कि सोच अगर तू उस कलेक्ट की जगह होती तो 2 महीने पहले तेरे गांव में किसी न किसी तरह मदद जरूर करती न कि गांव वालों को सिर्फ अस्वासन देके छोड़ देती ओर भूल जाती। मेरी दोस्त की ये बात मुझे बहुत चुभी ओर मेने उससे पूछा फिर क्या करना चाहिए ।

तो उसने बोला देख तुझे उस कलेक्टर की कुर्सी पे बैठना चाहये मतलब की तुझे कलेक्ट बनना चाहिए। उनकी ये बात सुनकर में बहुत हँसने लगी लेकिन बो बोली हस मत सोच कितनो का भला होगा अगर हम जैसे मेहनती लोग इस जॉब में जाये तो । फिर में घर आ गई और में भी गांव के बच्चों को फ्री में पढ़ाने लगी थी आपकी तरह ओर मुझे भी ये सब अच्छा लगने लगा था। मेरे दिमाग मे बस यही चल रहा था कि मेरी दोस्त बोल तो सही रही है। अगर कुछ करना है गांव और देश के लिए तो ये सबसे सही चीज है। फिर मेने अपने घरवालों को बताया बो लोग बहुत खुश हुए और वोले करना चाहये । फिर अगले दिन मेने अपनी दोस्त से बात की ओर ऑफिस के सामने वाली कोचिंग मव दोस्त के साथ ही एडमिशन ले लिया ये सोचकर कि कलेक्ट नही भी बनी तो कुछ सीखने को मिलेगा। और मैने जाना चालू कर दिया शुरू में बहुत समस्या हुई लेकिन धीरे धीरे सब ठीक हो गया और मेने दिल लगा के पढ़ाई की । ओर जैसे जैसे में पड़ती गई आपको ओर ज्यादा समझती गई और आपको मेने तभी माफ कर दिया और आपके लिए इज्जत बाद गई। 1 साल मेहनत करने के बाद मेरा पहली बार मे ही सेलेक्शन हो गया । मेरे घरवाले बहुत खुश थे और साथ मे मेरे गाँव वाले भी मुझे तो यकीन नही हुआ। उस दिन आपकी कमी महसूस हुई । लेकिन में जब भी अपने आपको आईने में देखती थी तो मुझे 1 समझदार आरती दिखती थी। ट्रेनिंग पूरी होने पर घरवालो ने शादी के लिए दवाब देना शुरू कर दिया और मैने सभी रिश्ते ठुकरा दिए। क्योंकि मेरे दिल मे तो बस आप ही थे। ये सब सुनके मेरा मन भर आया और में आरती के सामने सर झुकाये बैठा अपनी माफी की भीख मांग रहा था । लेकिन आरती बोली आपकी कोई गलती नही है । आपने उस दिन जो किया सही किया और में अपनी कामयाबी का सारा श्रेय आपको ही देती हूँ। न तो आप मेरी लाइफ में आते न ही आज में यहां तक पहुचती ।

अब तक मे समझ चुका था कि जिसको में कुछ साल पहले बच्ची समझता था बो आज मुझसे भी समझदार हो गई है। बात करते करते समय का पता नही चला शाम हो गई दोपहर से। मेरे कंधे पे सिर रखके आरती ये सब बात बता रही थी । और में ये सब सुन रहा था । फिर उसने मुझसे पूछा आपका क्या हुआ । में किस मुह से उससे बोलता की मेने तो exam ही नही दिया । और बो भी उस इंसान से जिसको मेने IAS के EXAM के लिए छोड़ दिया था। लेकिन इसके पहले में कुछ बोल पाता आरती बोल पड़ी कोई बात नही अब मर बन गई न अब आपको जरूरत नही आप बस आराम करना और जो अभी कर रहे हो वही करना । ये सुनके मुझे उसकी सोच पे ओर उसपे ओर गर्व होने लगा। फिर मेने उसको सब कुछ बताया मेरे बारे में तो आरती ने सिर्फ इतना बोली कि आप अपनी जगह सही थे और अगर मुझसे कोई अभी वैसा कुछ बोलेगा तो में भी मन कर दूंगी। में समझ सकती हूँ उस समय आप पे क्या बीती होगी । तो मैने आरती से कहा मतलब आपने मुझे माफ़ कर दिया। तो उसने कहा मेने तो आपको कबका माफ कर दीया ओर वैसे भी आपकी गलती नही थी। फिर हम उसके घर की ओर जाने लगे फिर अचानक से आरती ने पीछे से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली अरे एक बात तो बताना भूल गई मेने कहा क्या तो बो एकदम से मेरे सामने अपने घुटने पे बेठ गई और मुझसे पूछने लगी क्या आप मुझसे शादी करोगे। मेरे सामने सालो पहले का वही दृश्य आ गया जहाँ पे इसी लड़की ने मुझे इसी तरह अपने प्यार का इजहार किया था । उसे इस तरह देखके मुझे बहुत ही ज्यादा रोना आया और मैने उसे उठाके गले लगाया और फुट फुट के रोने लगा। उसने फिर मुझे संभाला ।

समय भी क्या रंग दिखलाता है कुछ साल पहले मेने उसे संभाला था और आज उसने मुझे। हम बस एक दूसरे को देखे जा रहे थे । आखिरकार उसने मुझसे कहा कि अब बो मुझे कही नही जाने देगी। बहुत नसीब से मिले हो अब नही खोना चाहती में आपको। में उसके अंदर अपने आपको देख सकता था जितनी समझदारी ओर शालीनता उसने थी शायद बो मुझमे भी कभी नही थी । सच मे ऐसा लग रहा था कि किसी कलेक्टर के साथ हूँ। लेक़िन उसने मुझसे बोल दीया था कि भले ही पूरी दुनिया के लिए IAS हूँ लेकिन आपके लिए में अभी भी छोटी सी नासमझ बच्ची हूँ। मुझे एकबार फिर अपनो पुरानी गलती का अहसास हुआ । हम फिर से अपने वही पुराने रंग में लौट आये। और अब बस ऐसा लग रहा था जैसे जान में जान आ गई हो। ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत लगने लगी थी आज । ओर ऐसा लग रहा था कि कहि में नींद तो नही देख रहा । लेकिन ये सच था और ऐसा सच जिसे में कभी नही भूल सकता । जिस बच्ची को मेने अपने IAS के सपने के लिए छोड़ दिया था आज वही बच्ची upsc में 3rd नंबर पर आई थी। और बहुत जल्द कलेक्टर की कुर्सी पर बैठने वाली थी और जो सपने मेरे थे आज उसके है। में तो सिर्फ उसको पाके ही खुश हूं ।

शायद हमारी किस्मत हमे ये सब दिखाना चाहती थी। एक लड़की दिल पे इतना गहरा असर छोड़ जाएगी कभी नही सोचा था। आज आरती को मुझसे कोई शिकायत नहीं है और बो पहले से भी ज्यादा खुश है वही चंचलता ओर आंखों में वही मासूमियत मेरा तो ये सब देखके मन ठहर जाता है क्या पता कोनसे अच्छे काम किये थे ज़िन्दगी में जो ये पागल लड़की मुझे मिल गई। लेकिन में आज भी अपने आपको माफ नही कर पाया ओर आज भी अपने से ही लड़ रहा हूँ। लेक़िन आरती के आने से जीवन मे फिर से रफ्तार आ गई है । आजकल फिर से समय पता नही चलता । आज भी बो मुझसे ये नही बोलती की आपने मेरे साथ बुरा किया । यही उसकी महानता को दर्शाता है। अब बस जीवन मे यही ख्वाहिश है कि उसका साथ यू ही बना रहे। आरती आज भी वैसी ही है जैसे वर्षों पहले थी। स्वभाव भी वही ओर तेवर भी वही ओर चंचलता भी वही। ओर ज़िद ऐसी की पूछो मत उसे देखके ऐसा लगता है कोई बच्चा अपनी माँ से चांद मांग रहा हो। बस इतनी थी मेरी कहानी ।

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