Digital Ishq – एक नई दास्‍तां

Digital Ishq

यू  तो आपने बहुत सी कविता पढी होगी लेकिन कुछ  कविता ऐसी  होती है जो दिल को छू  जाती उन्‍ही  मे से एक हम आपके लिए लेके आये है जो कि आज की Digital दुनिया को ध्‍यान मे रखकर बनायी गयी है ।

रोज सुबह जब मेरे कमरे में धूप का टुकड़ा कोने मे बैठा हुआ मिलता है। तुम्‍हारी करवटो की तरह जब आसमान भी अपनी साइडस बदलने लगता है। मानो कोई Whatsapp की Group Chat हो। जिसमे कई बाशिंदो की घुसपेठ हो पूरी सुबह, पूरी दोपहर, पूरी रात तुम्‍हारे यहा ना होते हुए भी तुम्‍हारे तबस्‍सुर की Notification ये घर बदस्‍तूर मुझे दिया करता है। इस घर मे कुछ बर्तन भी है जो एक दूसरे से Match नही होते। कुछ तुम्‍हारे घर से है कुछ मेरी Cupboard से जो Twitter Intellectuals की तरह बजते है। बात बात पे Outrage करते है। फिर यादो की Trolling मे फंसते है। दिल के Instagram पर सिर्फ तुम्‍हारी तस्‍वीर ही नही। तुम्‍हारी जुस्‍तजू भी Crop नही होती। मैने Adjust कर के देख लिया लेकिन ये Picture कभी Flop नही होती। अलमारी मे तुम्‍हारे कपड़ो की तरह एक HashTag मै प्‍यार लटकता  है। सारे Filter लगाके देख लिए। लेकिन ये Boomerang का फेन लगता है। सुना है Facebook पर अब सिर्फ Like ही नही Love भी हुआ करता है। ठीक उसी तरह जैसे मेरे घर का चूल्‍हा अब तुम्‍हारी तपिश का मुन्‍तजिर लगता है। जिस दिन तुम घर पर खाते हो। तुम्‍हारी पसन्‍द का खाना पकता है। मुझे ख्‍वाबीदा कहो या कहो तलबगार ये तो Reddit सा पेचीदा लगता है। एक बात तुम मेरी जान लो और इस बात को तुम मान भी लो ये Snapchat की तरह चंद पलो का नही ये तो आधार कार्ड की तरह पूरी जिंदगी का मामला लगता है। कोई चाहे Like, Share, Subscribe ना भी करे यहा तो बस इश्‍क का चेनल चलता है। यहा तो बस इश्‍क का चेनल चलता है।

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